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शुरू हुई इस्‍लामी तीर्थ यात्रा, जानें क्‍या है हज और कहां जाते हैं मुस्‍लिम?

इस्‍लामी तीर्थ यात्रा यानी की हज यात्रा शुरू हो गई है. दुनिया भर के मुस्‍लिम सउदी अरब के पवित्र शहर मक्‍का पहुंचना शुरू हो गए हैं. हज इस्‍लाम के पांच मुख्‍य उसूलों में से एक है. आइए आपको बताते हैं क्‍या है हज? कब शुरू होती है ये? और हज के लिए कहां पहुंचते हैं मुस्‍लिम और किस तरह करते हैं इबादत? हज अरबी भाषा का शब्‍द है इसका अर्थ होता है. तीर्थयात्रा. इस्‍लाम के पांच उसूलों में से हज एक महत्‍वपूर्ण उसूल है. जीवन में एक मुस्‍लिम को जरूर करना होता है. पूरी दुनिया के मुस्‍लिम हज के लिए हर साल पवित्र शहर मक्का पहुंचते हैं.हज इस्‍लाम का एक महत्‍वपूर्ण धार्मिक कर्तव्य है. इसे हर एक मुस्‍लिम को अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार जरूर पूरा करना होता है. चाहे फिर वह स्‍त्री हो या पुरुष. जो शरीर के साथ आर्थिक रूप से भी मजबूत होता है और इस यात्रा को करने में सक्षम होता है उस स्‍थित को इस्ति'ताह कहा जाता है और जो मुस्लिम इस शर्त को पूरा करता है मुस्ताती कहलाता है.यह तीर्थयात्रा इस्लामी कैलेंडर के 12 वें और अंतिम महीने धू अल हिज्जाह की 8 वीं से 12 वीं तारीख तक की जाती है. एक तरह से ये धू-अल-हिज्जा (इस्लामी वर्ष का आख़िरी महीना) के सातवें दिन तीर्थयात्रा शुरू होती और 12वें दिन पूरी होती है.दरअसल, इस्लामी कैलेंडर एक चंद्र के अाधार पर चलता है इसलिए पश्चिमी देशों में प्रयोग में आने वाले ग्रेगोरियन कैलेंडर से ग्यारह दिन कम होते हैं, इसीलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार हज की तारीखें साल दर साल बदलती रहती हैं. इहरम वो विशेष आध्यात्मिक स्थिति है जिसमें मुसलमान हज को दौरान रहते हैं.

जब तीर्थयात्री मक्का से लगभग 10 किलोमीटर दूर होता है, तब वह इहराम कहलाने वाली पाक (पवित्र) अवस्था में पहुंचता है और वह इहराम वस्त्र पहनता है, जो दो सफ़ेद बिना सिली चादरों से बना होता है.इहराम वस्‍त्र जिसे इहराम की चादर कहा जाता है, हज यात्री के शरीर के चारों तरफ लपेटा जाता है. हज पूरा होने तक हाजी न तो अपने बाल और न ही नाख़ून काटता है. वह मक्का पहुंचता है और बड़ी मस्जिद स्थित पाक काबा के चारों ओर सात बार परिक्रमा करता है.इसके बाद वह काले पत्थर (हजर-अल-आस्वद) को चूमता या छूता है और मक़ाम इब्राहीम व काबा की दिशा में दो बार नमाज़ पढ़ता है. इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद हज यात्री सफ़ा और मरवाह पहाड़ के बीच सात बार आता-जाता है. इसके बाद धू-अल-हिज्जा के सातवें दिन हाजी को उसके फ़र्ज़ याद दिलाए जाते हैं. इस अनुष्ठान के दूसरे चरण में, जो महीने के आठवें व बारहवें दिन के बीच होता है, हाजी मक्का के बाहर स्थित पाक जगहों, जबाल अर-रहमा, मुज्दलिफ़ा व मीना की यात्रा करता है और कुर्बानी की याद में एक जानवर कुर्बान करता है.

हर साल तकरीबन 20 लाख लोग हज करते हैं. इस मजहबी काम में विभिन्न पृष्ठभूमि के अनुयायियों के एक साथ आने के कारण यह इस्लाम में एकजुट करने की शक्ति का काम करता है. एक बार तीर्थयात्रा करने के बाद व्यक्ति अपने नाम के साथ हाजी जोड़ सकता है.

7 वीं शताब्दी से हज इस्लामी पैगंबर मुहम्मद के जीवन के साथ जुड़ा हुआ है, लेकिन मुसलमान मानते हैं कि मक्का की तीर्थयात्रा की यह रस्म हजारों सालों से यानि कि इब्राहीम के समय से चली आ रही है। तीर्थयात्री उन लाखों लोगों के जुलूस में शामिल होते हैं जो एक साथ हज के सप्ताह में मक्का में जमा होते हैं और यहं पर कई अनुष्ठानों में हिस्सा लेते हैं प्रत्येक व्यक्ति एक घनाकार इमारत काबा के चारों ओर वामावर्त सात बार चलता है जो कि मुस्लिमों के लिए प्रार्थना की दिशा है, अल सफा और अल मारवाह नामक पहाड़ियों के बीच आगे और पीछे चलता है, ज़मज़म के कुएं से पानी पीता है, चौकसी में खड़ा होने के लिए अराफात पर्वत के मैदानों में जाता है और एक शैतान को पत्थर मारने की रस्म पूरा करने के लिए पत्थर फेंकता है। उसके बाद तीर्थयात्री अपने सर मुंडवाते हैं, पशु बलि की रस्म करते हैं और इसके बाद ईद उल-अधा नामक तीन दिवसीय वैश्विक उत्सव मनाते हैं।


 



Author : Super

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