Q


Complete post

अगर आप अपने चोरी हुए मोबाइल फोन का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं, तो कोई फायदा नहीं है. क्योंकि हैकर्स बड़ी आसानी से आपके मोबाइल का IMEI नंबर बदलकर उसे मार्केट में बेच देते हैं और आपको मालूम भी नहीं चलता. ऐसा करने में हैकर्स और आईटी इंजीनियरों को बस चंद मिनटों का वक्त लगता है :

ऐसे बदला जाता है IMEI नंबर:
आईटी इंजीनियर और हैकर्स सॉफ्टवेयर के जरिए किसी भी स्मार्टफोन का इंटरनेशनल इक्विपमेंट आइडेंटीटी यानी आईएमईआई नंबर को बदल देते हैं.  इसके बाद मोबाइल को ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है. चोरी के मोबाइल का पूरा कारोबार ही इसी पर टिका हुआ है. तभी जब किसी का स्मार्टफोन चोरी होता है, तो पुलिस उसे ट्रेस नहीं कर पाती क्योंकि उसका नंबर बदला जा चुका होता है.

500 रुपए में चेंज हो जाता है IMEI नंबर :

हैकर्स सबसे पहले चोरी के हैंडसेट का पैटर्न अनलॉक करते हैं और उसके बाद फ्लैशर, ऑक्टोप्लस, वॉलकानो आदि सॉफ्टवेयर के जरिेए IMEI नंबर को बदल देते हैं. इसके लिए वो महज 500 रुपए लेते हैं. हैकर्स को क्वालकॉम स्नैपड्रेगन प्रोसेसर पर रन करने वाले स्मार्टफोन का IMEI नंबर बदलने में जरूर मुश्किल होती है. बाकि मीडिया टेक प्रोसेसर पर रन करने वाले स्मार्टफोन का आईएमईआई नंबर आसानी से बदल दिया जाता है.

सबसे ज्यादा यूज होता है फ्लैशर सॉफ्टवेयर:
हैकर्स और आईटी इंजीनियर IMEI नंबर बदलने के लिए सबसे ज्यादा फ्लैशर सॉफ्टवेयर का यूज करते हैं. क्योंकि ये सॉफ्टवेयर ज्यादा मंहगा नहीं है. हालांकि, यह सॉफ्यवेयर ऐप्पल के आईफोन पर काम नहीं करता है. इसके अलावा, दूसरे कई सॉफ्टवेयरों का भी इस्तेमाल किया जाता है.

हर कंपनी के हैंडसेट के लिए अलग सॉफ्टवेयर
अलग-अलग मोबाइल कंपनियों के हैंडसेट के लिए अलग-अलग  सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है. सैमसंग के हैंडसेट के लिए ऑक्टोप्लस सॉफ्टवेयर और एचटीसी के हैंडसेट के लिए वॉलकानो सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल होता है.

चाइनीज हैंडसेट के लिए यूज होता है अलग सॉफ्टवेयर
हैकर्स चाइनीज हैंडसेट के लिए अलग सॉफ्टवेयर का यूज करते हैं. आईटी इंजीनियर और हैकर्स टर्बो, मिरेकल, एसपीडी और बीएसटी जैसे सॉफ्टवेयर का यूज करते हैं. हालांकि, इसमें से कोई भी सॉफ्टवेयर आईफोन पर यूज नहीं होता है. ऐसे में आईफोन का आईएमईआई नंबर बदलना मुश्किल है.



Author : Super

All Comments.